Drone Didi Scheme: कृषि तकनीक के ज़रिए महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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Drone Didi Scheme: भारत में महिलाएं हमेशा से खेती-किसानी में अहम भूमिका निभाती आई हैं। वे खेतों में मेहनत करती हैं, बीज बोती हैं, फसल काटती हैं और घर की आर्थिक स्थिति संभालती हैं। लेकिन तकनीक के इस आधुनिक युग में खेती का तरीका बदल रहा है। ऐसे में महिलाओं को भी नई तकनीकों से जोड़ना बहुत जरूरी है। इसी सोच के साथ सरकार ने “Drone Didi Scheme” की शुरुआत की है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छूने का अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है।

Drone Didi Scheme क्या है?

Drone Didi Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कृषि ड्रोन चलाने और उनके उपयोग में प्रशिक्षित करना है। इस योजना के तहत, महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) को ड्रोन दिए जा रहे हैं ताकि वे खेती में ड्रोन तकनीक का उपयोग कर सकें।

सरकार का लक्ष्य है कि देश भर में 15,000 महिलाएं “ड्रोन दीदी” के रूप में प्रशिक्षित हों, जो अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य किसानों की मदद करेंगी और खेती को अधिक आधुनिक बनाएंगी।

Drone Didi Scheme योजना का मुख्य उद्देश्य

इस योजना के कई उद्देश्य हैं, जिनमें से मुख्य हैं:

  1. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना – ड्रोन चलाने और तकनीकी ज्ञान देने से महिलाएं खेती में नई भूमिका निभा सकेंगी और अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगी।
  2. खेती को आधुनिक बनाना – ड्रोन तकनीक से खेतों की निगरानी, खाद और कीटनाशक छिड़काव, तथा फसल की स्थिति का आकलन आसान हो जाता है।
  3. समय और श्रम की बचत – ड्रोन की मदद से बड़ी जमीन पर कम समय में काम पूरा हो सकता है, जिससे महिलाओं का समय और मेहनत दोनों बचती है।
  4. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना – महिलाएं ड्रोन सेवा प्रदान कर अपने गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।
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ड्रोन कैसे मदद करता है खेती में?

खेती में ड्रोन का इस्तेमाल आज के समय में बहुत उपयोगी साबित हो रहा है। इसके कुछ मुख्य फायदे हैं –

  • खेत की निगरानी (Crop Monitoring): ड्रोन ऊँचाई से फसल की तस्वीरें लेकर किसानों को बताता है कि कौन-सा हिस्सा ज्यादा या कम उपजाऊ है।
  • खाद और कीटनाशक का छिड़काव: ड्रोन की मदद से खेतों में समान रूप से खाद या दवा छिड़कना आसान होता है, जिससे फसल को सही पोषण मिलता है।
  • जल बचत: ड्रोन से दवा या पानी का छिड़काव करने पर कम मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है।
  • उत्पादन बढ़ाना: फसल की सही निगरानी और पोषण मिलने से उपज बढ़ जाती है।

महिलाओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था

ड्रोन दीदी योजना के तहत सरकार महिलाओं को ड्रोन ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित कर रही है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

महिलाओं को सिखाया जाता है कि:

  • ड्रोन कैसे चलाया जाता है,
  • उसका रखरखाव कैसे करें,
  • ड्रोन से खेतों में दवा या खाद कैसे छिड़कें,
  • फसलों की स्थिति की रिपोर्ट कैसे बनाएं।

यह प्रशिक्षण लगभग 15 से 30 दिनों का होता है, जिसके बाद महिलाओं को ड्रोन लाइसेंस भी दिया जाता है।

सरकार का सहयोग और वित्तीय सहायता

ड्रोन दीदी योजना के तहत सरकार महिला समूहों को 80% तक की वित्तीय सहायता (सब्सिडी) देती है।
इससे महिलाएं आसानी से ड्रोन खरीद सकती हैं और उसे कृषि कार्यों में इस्तेमाल कर सकती हैं।

कई जगहों पर सरकार कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से भी ड्रोन उपलब्ध करा रही है, ताकि ग्रामीण महिलाएं समूह के रूप में मिलकर काम कर सकें।

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महिलाओं के लिए लाभ

  1. नई आजीविका का साधन: महिलाएं ड्रोन से कृषि सेवाएं देकर अन्य किसानों से आय प्राप्त कर सकती हैं।
  2. सामाजिक पहचान: तकनीक से जुड़ने पर महिलाओं का आत्मविश्वास और समाज में सम्मान दोनों बढ़ते हैं।
  3. तकनीकी ज्ञान: अब महिलाएं भी डिजिटल और आधुनिक कृषि का हिस्सा बन रही हैं।
  4. रोज़गार सृजन: यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर तैयार करती है।

ड्रोन दीदी योजना का प्रभाव

इस योजना ने ग्रामीण भारत में महिलाओं की भूमिका को नया रूप दिया है। पहले जहां महिलाएं सिर्फ खेती के पारंपरिक काम तक सीमित थीं, अब वे तकनीकी विशेषज्ञ बन रही हैं।
ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधर रही है, खेती में दक्षता बढ़ी है, और गांवों में तकनीकी जागरूकता भी फैल रही है।

निष्कर्ष

ड्रोन दीदी योजना केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि यह महिलाओं की आत्मनिर्भरता और कृषि क्रांति की नई दिशा है।
यह योजना बताती है कि जब महिलाएं तकनीक से जुड़ती हैं, तो न सिर्फ वे खुद मजबूत होती हैं बल्कि पूरा समाज प्रगति की ओर बढ़ता है।

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